सपनों को आकार देने के लिए हौसला, मेहनत और सही समय पर मिला सहयोग की जरूरत होती है। हरीराम नामदेव के आत्मनिर्भर बनने की दास्तां इसी विश्वास की मिसाल है। छोटी सी कपड़ा दुकान से शुरू हुआ उनका सफर आज विस्तार की नई ऊंचाइयां छू रहा है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से मिली मदद ने उन्हें सफलता के सोपान तक पहुँचाया है। श्री हरीराम नामदेव ग्वालियर जिले के मोहना कस्बे के निवासी हैं।
मोहना में “हरीराम मेसर्स हरिराम धनाराम क्लॉथ सेंटर” के नाम से उनकी दुकान है। हरीराम के मन में कारोबार बढ़ाने की इच्छा तो थी, लेकिन पूंजी की कमी आड़े आ रही थी। इसी दौर में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना उनका सहारा बनी। इस योजना के तहत उन्हें 22 लाख 50 हजार रुपए का ऋण केनरा बैंक से मंजूर हुआ।
खास बातें
- बढ़ी हुई कार्यशील पूंजी से हरीराम ने कारोबार का दायरा तेजी से बढ़ाया।
- आज उनका प्रतिष्ठान लगभग 5 लाख रुपए प्रतिमाह का व्यापार कर रहा है।
- हरीराम कहते हैं कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार व आत्मनिर्भरता के अवसर देने पर निरंतर जोर दिया गया है।
यहीं से उनकी सफलता की नई उड़ान शुरू हो गई। बढ़ी हुई कार्यशील पूंजी से हरीराम ने कारोबार का दायरा तेजी से बढ़ाया। आज उनका प्रतिष्ठान लगभग 5 लाख रुपए प्रतिमाह का व्यापार कर रहा है। इस विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी बने हैं।
हरीराम कहते हैं कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार व आत्मनिर्भरता के अवसर देने पर निरंतर जोर दिया गया है। मुद्रा योजना हम जैसे जरूरतमंदों के लिये इसी संकल्प का सशक्त माध्यम बनी है। हरीराम नामदेव की कहानी उन तमाम छोटे कारोबारियों और युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने हुनर और परिश्रम के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
उनकी आत्मनिर्भरता की कहानी संदेश देती है कि सपने बड़े हों, मेहनत निरंतर हो और अवसर का सही उपयोग किया जाए, तो आत्मनिर्भरता की राह खुद-ब-खुद आसान हो जाती है। हरीराम जैसे नव उद्यमियों की सफलता सरकार द्वारा वर्तमान में चलाए जा रहे सेवा-संकल्प अभियान की संकल्पना को सार्थक रूप प्रदान कर रही है।

